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शान्ति पर्व
अध्याय ११२
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भीष्म उवाच
एक एकेन सङ्गम्य रहो व्रूय़ां हितं तव |  ३७   क
न च ते ज्ञातिकार्येषु प्रष्टव्योऽहं हिताहिते ||  ३७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति