menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
द्रोण पर्व
अध्याय १०४
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
भीमसेनस्य निनदं घोरं श्रुत्वा रणाजिरे |  १२   क
खं च भूमिं च सम्वद्धां मेनिरे क्षत्रिय़र्षभाः ||  १२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति