शान्ति पर्व  अध्याय २६३

भीष्म उवाच

सुप्रसन्ना हि ते देवा यत्ते धर्मे रता मतिः |  ५५   क
धने सुखकला काचिद्धर्मे तु परमं सुखम् ||  ५५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति