भीष्म पर्व  अध्याय २५

श्रीभगवानु उवाच

लोकेऽस्मिन्द्विविधा निष्ठा पुरा प्रोक्ता मय़ानघ |  ३   क
ज्ञानय़ोगेन साङ्ख्यानां कर्मय़ोगेन योगिनाम् ||  ३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति