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द्रोण पर्व
अध्याय ७३
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सञ्जय़ उवाच
ततो रजतसङ्काशा माधवस्य हय़ोत्तमाः |  ११   क
द्रोणस्याभिमुखाः शीघ्रमगच्छन्वातरंहसः ||  ११   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति