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शान्ति पर्व
अध्याय २६४
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भीष्म उवाच
ततस्तं भगवान्धर्मो यज्ञं याजय़त स्वय़म् |  १८   क
समाधानं च भार्याय़ा लेभे स तपसा परम् ||  १८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति