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वन पर्व
अध्याय २६४
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मार्कण्डेय़ उवाच
सुग्रीवः प्राप्य किष्किन्धां ननादौघनिभस्वनः |  १६   क
नास्य तन्ममृषे वाली तं तारा प्रत्यषेधय़त् ||  १६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति