वन पर्व  अध्याय २६४

मार्कण्डेय़ उवाच

तारां परुषमुक्त्वा स निर्जगाम गुहामुखात् |  २६   क
स्थितं माल्यवतोऽभ्याशे सुग्रीवं सोऽभ्यभाषत ||  २६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति