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वन पर्व
अध्याय ९९
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लोमश उवाच
ज्ञात्वा वलस्थं त्रिदशाधिपं तु; ननाद वृत्रो महतो निनादान् |  १२   क
तस्य प्रणादेन धरा दिशश्च; खं द्यौर्नगाश्चापि चचाल सर्वम् ||  १२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति