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वन पर्व
अध्याय २६४
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मार्कण्डेय़ उवाच
गर्हय़ित्वा स काकुत्स्थं पपात भुवि मूर्छितः |  ३८   क
तारा ददर्श तं भूमौ तारापतिमिव च्युतम् ||  ३८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति