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शान्ति पर्व
अध्याय २६५
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भीष्म उवाच
पापं चिन्तय़ते चैव प्रव्रवीति करोति च |  १०   क
तस्याधर्मप्रवृत्तस्य दोषान्पश्यन्ति साधवः ||  १०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति