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शान्ति पर्व
अध्याय २६५
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भीष्म उवाच
प्रज्ञाचक्षुर्यदा कामे दोषमेवानुपश्यति |  १९   क
विरज्यते तदा कामान्न च धर्मं विमुञ्चति ||  १९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति