आदि पर्व  अध्याय २१३

वैशम्पाय़न उवाच

दीर्घवाहुं महासत्त्वमृषभाक्षमरिन्दमम् |  ५९   क
सुभद्रा सुषुवे वीरमभिमन्युं नरर्षभम् ||  ५९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति