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शान्ति पर्व
अध्याय २६५
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भीष्म उवाच
विज्ञानार्थं हि पञ्चानामिच्छा पूर्वं प्रवर्तते |  ३   क
प्राप्य ताञ्जाय़ते कामो द्वेषो वा भरतर्षभ ||  ३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति