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शान्ति पर्व
अध्याय ५६
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भीष्म उवाच
न च क्षान्तेन ते भाव्यं नित्यं पुरुषसत्तम |  ३७   क
अधर्म्यो हि मृदू राजा क्षमावानिव कुञ्जरः ||  ३७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति