शल्य पर्व  अध्याय ४५

वैशम्पाय़न उवाच

कालेडिका वामनिका मुकुटा चैव भारत |  २३   क
लोहिताक्षी महाकाय़ा हरिपिण्डी च भूमिप ||  २३   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति