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वन पर्व
अध्याय २६६
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मार्कण्डेय़ उवाच
नास्मि लक्ष्मण दुर्मेधा न कृतघ्नो न निर्घृणः |  १६   क
श्रूय़तां यः प्रय़त्नो मे सीतापर्येषणे कृतः ||  १६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति