वन पर्व  अध्याय १३८

लोमश उवाच

प्रतिषिद्धो मय़ा तात रैभ्यावसथदर्शनात् |  १२   क
गतवानेव तं क्षुद्रं कालान्तकय़मोपमम् ||  १२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति