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उद्योग पर्व
अध्याय १२४
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वैशम्पाय़न उवाच
अर्जुनेन यमाभ्यां च त्रिभिस्तैरभिवादितः |  १६   क
मूर्ध्नि तान्समुपाघ्राय़ प्रेम्णाभिवद पार्थिव ||  १६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति