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वन पर्व
अध्याय २६७
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मार्कण्डेय़ उवाच
तेन व्यूढेन सैन्येन लोकानुद्वर्तय़न्निव |  १५   क
प्रय़यौ राघवः श्रीमान्सुग्रीवसहितस्तदा ||  १५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति