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शल्य पर्व
अध्याय १४
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सञ्जय़ उवाच
तय़ोरासन्महाराज शरधाराः सहस्रशः |  २   क
अम्वुदानां यथा काले जलधाराः समन्ततः ||  २   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति