menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
वन पर्व
अध्याय २६७
chevron_left
chevron_right
मार्कण्डेय़ उवाच
कौसल्यामातरित्येवमाभाष्य मधुरं वचः |  ३४   क
इदमित्याह रत्नानामाकरैः शतशो वृतः ||  ३४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति