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वन पर्व
अध्याय २६७
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मार्कण्डेय़ उवाच
यदि दास्यामि ते मार्गं सैन्यस्य व्रजतोऽऽज्ञय़ा |  ४०   क
अन्येऽप्याज्ञापय़िष्यन्ति मामेवं धनुषो वलात् ||  ४०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति