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अनुशासन पर्व
अध्याय ८७
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भीष्म उवाच
द्वादश्यामीहमानस्य नित्यमेव प्रदृश्यते |  १५   क
रजतं वहु चित्रं च सुवर्णं च मनोरमम् ||  १५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति