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वन पर्व
अध्याय २४७
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देवदूत उवाच
एतत्स्वर्गसुखं विप्र लोका नानाविधास्तथा |  २७   क
गुणाः स्वर्गस्य प्रोक्तास्ते दोषानपि निवोध मे ||  २७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति