आदि पर्व  अध्याय २७

सूत उवाच

तपस्तप्त्वा व्रतपरा स्नाता पुंसवने शुचिः |  २५   क
उपचक्राम भर्तारं तामुवाचाथ कश्यपः ||  २५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति