अनुशासन पर्व  अध्याय २७

वैशम्पाय़न उवाच

वृहस्पतिसमं वुद्ध्या क्षमय़ा व्रह्मणः समम् |  १   क
पराक्रमे शक्रसममादित्यसमतेजसम् ||  १   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति