उद्योग पर्व  अध्याय ११४

नारद उवाच

ततो वसुमना नाम वसुभ्यो वसुमत्तरः |  १७   क
वसुप्रख्यो नरपतिः स वभूव वसुप्रदः ||  १७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति