अनुशासन पर्व  अध्याय २७

भीष्म उवाच

इमां कश्चित्परिक्रम्य पृथिवीं शैलभूषिताम् |  २०   क
असकृद्द्विपदां श्रेष्ठः श्रेष्ठस्य गृहमेधिनः ||  २०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति