आश्वमेधिक पर्व  अध्याय ७५

वैशम्पाय़न उवाच

अग्रहस्तप्रमुक्तेन शीकरेण स फल्गुनम् |  ७   क
समुक्षत महाराज शैलं नील इवाम्वुदः ||  ७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति