menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
आश्वमेधिक पर्व
अध्याय २७
chevron_left
chevron_right
व्राह्मण उवाच
गिरय़ः पर्वताश्चैव सन्ति तत्र समासतः |  २१   क
नद्यश्च सरितो वारि वहन्त्यो व्रह्मसम्भवम् ||  २१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति