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आश्रमवासिक पर्व
अध्याय २७
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वैशम्पाय़न उवाच
तत्राहमिदमश्रौषं शक्रस्य वदतो नृप |  १०   क
वर्षाणि त्रीणि शिष्टानि राज्ञोऽस्य परमाय़ुषः ||  १०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति