वन पर्व  अध्याय २७

वैशम्पाय़न उवाच

पश्य द्वैतवने पार्थ व्राह्मणानां तपस्विनाम् |  ६   क
होमवेलां कुरुश्रेष्ठ सम्प्रज्वलितपावकाम् ||  ६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति