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विराट पर्व
अध्याय २७
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वैशम्पाय़न उवाच
स्वैः स्वैर्गुणैः सुसंय़ुक्तास्तस्मिन्वर्षे त्रय़ोदशे |  २१   क
देशे तस्मिन्भविष्यन्ति तात पाण्डवसंय़ुते ||  २१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति