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उद्योग पर्व
अध्याय २७
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सञ्जय़ उवाच
पापानुवन्धं को नु तं कामय़ेत; क्षमैव ते ज्याय़सी नोत भोगाः |  २४   क
यत्र भीष्मः शान्तनवो हतः स्या; द्यत्र द्रोणः सहपुत्रो हतः स्यात् ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति