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शल्य पर्व
अध्याय २७
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सञ्जय़ उवाच
अथोत्क्रुष्टं महद्ध्यासीत्पाण्डवैर्जितकाशिभिः |  ४१   क
धार्तराष्ट्रास्ततः सर्वे प्राय़शो विमुखाभवन् ||  ४१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति