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आदि पर्व
अध्याय १२०
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वैशम्पाय़न उवाच
चतुर्विधं धनुर्वेदमस्त्राणि विविधानि च |  २०   क
निखिलेनास्य तत्सर्वं गुह्यमाख्यातवांस्तदा |  २०   ख
सोऽचिरेणैव कालेन परमाचार्यतां गतः ||  २०   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति