वन पर्व  अध्याय २७०

मार्कण्डेय़ उवाच

स दंशितोऽभिनिर्याय़ त्वमद्य वलिनां वर |  २६   क
रामादीन्समरे सर्वाञ्जहि शत्रूनरिन्दम ||  २६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति