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शान्ति पर्व
अध्याय २७१
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भीष्म उवाच
गतिं च यां दर्शनमाह देवो; गत्वा शुभं दर्शनमेव चाह |  ३५   क
गतिः पुनर्वर्णकृता प्रजानां; वर्णस्तथा कालकृतोऽसुरेन्द्र ||  ३५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति