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शान्ति पर्व
अध्याय २७१
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भीष्म उवाच
कृष्णस्य वर्णस्य गतिर्निकृष्टा; स मज्जते नरके पच्यमानः |  ३७   क
स्थानं तथा दुर्गतिभिस्तु तस्य; प्रजाविसर्गान्सुवहून्वदन्ति ||  ३७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति