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शान्ति पर्व
अध्याय २७१
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भीष्म उवाच
स देवलोके विहरत्यभीक्ष्णं; ततश्च्युतो मानुषतामुपैति |  ४३   क
संहारविक्षेपशतानि चाष्टौ; मर्त्येषु तिष्ठन्नमृतत्वमेति ||  ४३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति