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शान्ति पर्व
अध्याय २७१
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भीष्म उवाच
संहारविक्षेपमनिष्टमेकं; चत्वारि चान्यानि वसत्यनीशः |  ४७   क
षष्ठस्य वर्णस्य परा गतिर्या; सिद्धा विशिष्टस्य गतक्लमस्य ||  ४७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति