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शान्ति पर्व
अध्याय २७२
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महेश्वर उवाच
अनेन हि तपस्तप्तं वलार्थममराधिप |  ३६   क
षष्टिं वर्षसहस्राणि व्रह्मा चास्मै वरं ददौ ||  ३६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति