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शान्ति पर्व
अध्याय २७२
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महेश्वर उवाच
महत्त्वं योगिनां चैव महामाय़त्वमेव च |  ३७   क
महावलत्वं च तथा तेजश्चाग्र्यं सुरेश्वर ||  ३७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति