वन पर्व  अध्याय ४१

वैशम्पाय़न उवाच

उपतस्थे महात्मानं यथा त्र्यक्षमुमापतिम् |  १९   क
प्रतिजग्राह तच्चापि प्रीतिमानर्जुनस्तदा ||  १९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति