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शान्ति पर्व
अध्याय २७३
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भीष्म उवाच
अनुसृत्य तु यत्नात्स तय़ा वै व्रह्महत्यया |  १७   क
तदा गृहीतः कौरव्य निश्चेष्टः समपद्यत ||  १७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति