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शान्ति पर्व
अध्याय २७३
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व्रह्मो उवाच
तमेषा यास्यति क्षिप्रं तत्रैव च निवत्स्यति |  ३२   क
व्रह्महत्या हव्यवाह व्येतु ते मानसो ज्वरः ||  ३२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति