शान्ति पर्व  अध्याय २३८

व्यास उवाच

एवं पूर्वापरे रात्रे युञ्जन्नात्मानमात्मना |  १२   क
सत्त्वाहारविशुद्धात्मा पश्यत्यात्मानमात्मनि ||  १२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति