menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
शल्य पर्व
अध्याय ४
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
नाभ्यसूय़ामि ते वाक्यमुक्तं स्निग्धं हितं त्वय़ा |  २४   क
न तु सन्धिमहं मन्ये प्राप्तकालं कथञ्चन ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति