अनुशासन पर्व  अध्याय ६९

भीष्म उवाच

स वासुदेवेन समुद्धृतश्च; पृष्टश्च कामान्निजगाद राजा |  ७   क
नृगस्तदात्मानमथो न्यवेदय़; त्पुरातनं यज्ञसहस्रय़ाजिनम् ||  ७   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति